जब तक तुम साथ थी
मन में खुशियों के
फूल खिला करते थे
अब तो दुःखों के बादल
छाए हुए हैं।
जब तक तुम साथ थी
जीवन सुहाना सफर
लगता था
अब तो जीवन गुजरा हुवा
कारवां लगता है।
जब तक तुम साथ थी
आँखों में सुख की नींद
बसा करती थी
अब तो आँखों से केवल
अश्रु बहते हैं।
जब तक तुम साथ थी
होठों से प्यार भरे गीत
निकलते थे
अब तो दिल से केवल
आहें निकलती हैं।
जब तक तुम साथ थी
दिन सोने के और रातें
चांदी की होती थी
अब तो दिन रेगिस्तान और
रातें पहाड़ होती है।
पेज संख्या -------66
मन में खुशियों के
फूल खिला करते थे
अब तो दुःखों के बादल
छाए हुए हैं।
जब तक तुम साथ थी
जीवन सुहाना सफर
लगता था
अब तो जीवन गुजरा हुवा
कारवां लगता है।
जब तक तुम साथ थी
आँखों में सुख की नींद
बसा करती थी
अब तो आँखों से केवल
अश्रु बहते हैं।
जब तक तुम साथ थी
होठों से प्यार भरे गीत
निकलते थे
अब तो दिल से केवल
आहें निकलती हैं।
जब तक तुम साथ थी
दिन सोने के और रातें
चांदी की होती थी
अब तो दिन रेगिस्तान और
रातें पहाड़ होती है।
पेज संख्या -------66
No comments:
Post a Comment