जब से तुम बिछुड़ी हो मुझ से
मेरे नैनो में नींद नहीं है।
मेरे नैनो में नींद नहीं है।
मन में प्यार का दीप जलता
हैत का सागर हबोले लेता
हैत का सागर हबोले लेता
अब वह स्नेह स्पर्श नहीं है अब मेरे नैनो में नींद नहीं है।
जब-जब तुम मुस्कराती
अधरों पर प्यार का गीत उभरता
सावन कजरी गाने लगता
अब वह मनभावन मुस्कान नहीं है
अब मेरे नैनो में नींद नहीं है।
तुम्हारे तन की उन्मादक गंध
मेरे गीतों में मादकता भरती
दिल में प्यार के फूल खिलाती
अब वह उन्मादक गंध नहीं है
अब मेरे नैनो में नींद नहीं है।
तुम्हारे नयनों की छवि देख
तुम्हारे नयनों की छवि देख
कजरारे बदरा पर गीत उमड़ते
होठों पर झूलों वाले गीत मचलते
अब वह नयनों का बांकापन नहीं है
अब मेरे नैनो में नींद नहीं है।
तुम्हारे पायल के स्वर से
तुम्हारे पायल के स्वर से
भंवरों के गुंजन सा गीत निकलता
सावन श्यामल धन बन छा जाता
अब वह पायल का संगीत नहीं है
अब मेरे नैनो में नींद नहीं है।
जब से तुम बिछुड़ी हो मुझ से
मेरे नैनो में नींद नहीं है।
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