दिवाली है आज
बहुएं-बेटे दीप जला कर
कर रहे हैं घर में रोशनी
पोते-पोतियां
हर साल की तरह
जला रहे हैं आतिशबाजी
खाने की थाली
सजा रही है बहुएं
ढ़ेर सारे मिष्ठानों के साथ
आज तुम नहीं हो
कौन करेगा मनवार
कि थोड़ा तो और लो
कौन पूछेगा आज
कैसा बना है हलवा ?
कैसा बना है
कांजी बड़े का पानी ?
मेरी दीवाली तो तब होती
जब तुम मेरे साथ होती
बिना तुम्हारे क्या तो दिवाली
और क्या होली।
पेज संख्यां -------- २८
बहुएं-बेटे दीप जला कर
कर रहे हैं घर में रोशनी
पोते-पोतियां
हर साल की तरह
जला रहे हैं आतिशबाजी
खाने की थाली
सजा रही है बहुएं
ढ़ेर सारे मिष्ठानों के साथ
आज तुम नहीं हो
कौन करेगा मनवार
कि थोड़ा तो और लो
कौन पूछेगा आज
कैसा बना है हलवा ?
कैसा बना है
कांजी बड़े का पानी ?
मेरी दीवाली तो तब होती
जब तुम मेरे साथ होती
बिना तुम्हारे क्या तो दिवाली
और क्या होली।
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