फ्रेम में जड़ी तुम्हारी
तस्वीर देख कर सोचता हूँ
बह रही होगी मन में
तस्वीर देख कर सोचता हूँ
आज भी दमक रही होगी
तुम्हारे भाल पर लाल बिंदिया
कन्धों पर लहरा रहे होंगे
सुनहरे रेशमी बाल
चहरे पर फूट रहा होगा
हँसी का झरना
चमक रही होगी मद भरी आँखें
चमक रही होगी मद भरी आँखें
झेंप रही होगी थोड़ी सी पलकें
देह से फुट रही होगी
संदली सौरभ
बह रही होगी मन में
मिलन की उमंग
बौरा रही होगी प्रीत चितवन
गूंज रहा होगा रोम-रोम में
प्यार का अनहद - नाद
मेरे मन में आज भी थिरकती है
आषाढ की बारिश में उपजे
तालछापर के मोथियों की
जड़ों सी मीठी तुम्हारी यादें।
पेज संख्यां -----२९
प्यार का अनहद - नाद
मेरे मन में आज भी थिरकती है
आषाढ की बारिश में उपजे
तालछापर के मोथियों की
जड़ों सी मीठी तुम्हारी यादें।
पेज संख्यां -----२९
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