ओ सावन के कारे मेघा,जाकर देना उसको पाती
बेटे-बहुएँ याद कर रहे, याद कर रही पोती रानी।
बच्चे दादी-दादी करते, बहता नयनों से पानी
रातों में सोने से पहले,कौन सुनाए उन्हें कहानी। मीठी-मीठी लौरी गाकर, पोती रोज सुलाया करती परियों की बातें बतलाती, बात नहीं है बहुत पुरानी।
दरवाजे पर गुड़ खाने को,आ जाती है धौली-काली
कहना उसको याद कर रही,अंगना की तुलसी रानी।
शाम ढले मंदिर की घण्टी, प्रभु की महिमा जब गाती कहना उसको याद कर रही, घर की दीया ओ बाती।
शाम ढले मंदिर की घण्टी, प्रभु की महिमा जब गाती कहना उसको याद कर रही, घर की दीया ओ बाती।
मेरे सुख-दुःख की तुम, मत कहना कोई भी बात
रोते-रोते सूख गया है, अब मेरे नयनों का पानी।
page sankhya ------45
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