मुझ को सारा सुख देने में
तुमने जीवन सुख माना,
मेरी हर पीड़ा मुश्किल को
तुमने अपना दुःख माना
जब से तुम बिछुड़ी हो मुझ से
खुशियाँ बिछुड़ गई जीवन से।
सच्ची सेवा और लगन से
पूर्ण रूप तुम रही समर्पित,
हर पल मेरा साथ निभाया
कर दिया जीवन साराअर्पित।
जब से तुम रूठी हो मुझे से
खुशियाँ रूठ गई जीवन से।
मुस्कान तुम्हारे अधरों की
मेरे जीवन में साथ रही,
प्रीत तुम्हारी अमृत बनके
गंगा जल सी सदा बही
जब से दूर हुई हो मुझसे
खुशियाँ दूर हुई जीवन से।
सुषमा-सौरभ बिखरा कर
मेरा जीवन सफल बनाया
साथ दिया सुख-दुःख में मेरा
खुशियों का संसार सजाया
जब से तुम निकली जीवन से
खुशियाँ निकल गई जीवन से।
page sankhya -----27
तुमने जीवन सुख माना,
मेरी हर पीड़ा मुश्किल को
तुमने अपना दुःख माना
जब से तुम बिछुड़ी हो मुझ से
खुशियाँ बिछुड़ गई जीवन से।
सच्ची सेवा और लगन से
पूर्ण रूप तुम रही समर्पित,
हर पल मेरा साथ निभाया
कर दिया जीवन साराअर्पित।
जब से तुम रूठी हो मुझे से
खुशियाँ रूठ गई जीवन से।
मुस्कान तुम्हारे अधरों की
मेरे जीवन में साथ रही,
प्रीत तुम्हारी अमृत बनके
गंगा जल सी सदा बही
जब से दूर हुई हो मुझसे
खुशियाँ दूर हुई जीवन से।
सुषमा-सौरभ बिखरा कर
मेरा जीवन सफल बनाया
साथ दिया सुख-दुःख में मेरा
खुशियों का संसार सजाया
जब से तुम निकली जीवन से
खुशियाँ निकल गई जीवन से।
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