गुलमोहर की छाँव तले
मैं आज लिखने बैठा
मैं आज लिखने बैठा
एक प्रेम कविता
चमकते जुगनू
रात भर देते रहे प्रेम-भाव
लिखने एक प्रेम कविता
चाँद की चांदनी
निहारती रही रात भर
लिखते एक प्रेम कविता
नन्हें सितारे
बिखेरते रहे दूधिया रोशनी
लिखने एक प्रेम कविता
श्वेत हंसों के
परों पर सजाया छंदों को
भेजने एक प्रेम कविता
समूची कायनात
दे रही थी साथ लिखने
एक प्रेम कविता
तुम्हारे लिए
तुम्हें लिख भेजने को
एक प्रेम कविता।
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