भीगे मौसम की अंगड़ाई लेकर, होली आई
हूरियारों की टोली, जब रंग ले कर आई
कोयल की मल्हार सुन, मुझे तुम याद आई।
अबीर-गुलाल उड़ाते हुए, आज होली आई
होली के रंग-चंग देख, मुझे तुम याद आई।
होली के रंग-चंग देख, मुझे तुम याद आई।
खिल उठा मन -उपवन, जब होली आई
बासंती वसुंधरा देख, मुझे तुम याद आई।
बासंती वसुंधरा देख, मुझे तुम याद आई।
हूरियारों की टोली, जब रंग ले कर आई
हाथों में गुलाल देख, मुझे तुम याद आई।
रंगे हुए कपड़े और चेहरे, लेकर होली आई
सात रंग और सात स्वर ले कर होली आई
पेज संख्या ---- ५५
रंगे हुए कपड़े और चेहरे, लेकर होली आई
फिजा में बिखरे रंग देख, मुझे तुम याद आई।
रंग भरी पिचकारी देख, मुझे तुम याद आई।
पेज संख्या ---- ५५
No comments:
Post a Comment