याद आती है आज भी
घूँघट की आड़ में
तुम्हारा मुस्कराना
बारिश के मौसम में
छत पर भीगना
बारिश के मौसम में
छत पर भीगना
याद आती है आज भी
गुदगुदाती रातों में
शरारत भरी मुस्कराहटें
पायल वाले पांवों की
खनकती आहटें
याद आती है आज भी
चंचल चितवन और
शोखभरी अदाएं
मखमली पलकें और
बिखरी-बिखरी जुल्फें
मखमली पलकें और
बिखरी-बिखरी जुल्फें
दिन और महीने बीत गए
लेकिन नहीं मानता हिया
आज भी पुकारता है
प्रिया ! प्रिया !प्रिया!
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