Sunday, 20 November 2016

नहीं मानता हिया

याद आती है आज भी 
घूँघट की आड़ में
तुम्हारा मुस्कराना
बारिश के मौसम में
छत पर भीगना

याद आती है आज भी 
गुदगुदाती रातों में 
शरारत भरी मुस्कराहटें 
पायल वाले पांवों की
खनकती आहटें 

याद आती है आज भी 
चंचल चितवन और
शोखभरी अदाएं
मखमली पलकें और
बिखरी-बिखरी जुल्फें 

दिन और महीने बीत गए
लेकिन नहीं मानता हिया
आज भी पुकारता है
प्रिया ! प्रिया !प्रिया!


पेज संख्या ----४५ 

No comments:

Post a Comment