आज से
ठीक नौ महीने पहले
काल के क्रूर हाथों ने
तुमको छीन लिया था मुझ से
जब तक
तुम्हारा साथ था
भोर की उजली धूप की तरह
सुख लिपटा रहता था मुझ से
खुशियाँ सारी
रहती थी मेरी मुट्ठी में
हथेलियाँ छोटी पड़ जाती थी
थामने को सुख
आज जीवन से
फिसल गया पारे की तरह
छूप गया है रूठ कर
वक़्त की झाड़ियों में सुख
याद आ रहा है
तुम्हारा हँसता चेहरा
गजल कहती वो प्यारी आँखे
दिवार पर लगी
तुम्हारी तस्वीर देख
छलक पड़ती है मेरी आँखे।
कोलकाता
६ अप्रैल,२०१५
पेज संख्या ----३७
ठीक नौ महीने पहले
काल के क्रूर हाथों ने
तुमको छीन लिया था मुझ से
जब तक
तुम्हारा साथ था
भोर की उजली धूप की तरह
सुख लिपटा रहता था मुझ से
खुशियाँ सारी
रहती थी मेरी मुट्ठी में
हथेलियाँ छोटी पड़ जाती थी
थामने को सुख
आज जीवन से
फिसल गया पारे की तरह
छूप गया है रूठ कर
वक़्त की झाड़ियों में सुख
याद आ रहा है
तुम्हारा हँसता चेहरा
गजल कहती वो प्यारी आँखे
दिवार पर लगी
तुम्हारी तस्वीर देख
छलक पड़ती है मेरी आँखे।
कोलकाता
६ अप्रैल,२०१५
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