खोया मन
नींद की प्रतीक्षा में
नींद की प्रतीक्षा में
करवटें बदलता रहता है
आँखें ढलकाती है
अश्रु सारी रात
अश्रु सारी रात
तकिया भीगता रहता है
बेवफा हो जाती है
दुःख में नींद भी
वो भी साथ नहीं देती
मन का दर्द चाहता है
सुखद स्पर्श
तस्वीर साथ नहीं देती
स्मृतियाँ
कुरेदती रहती है मन को
दर्द बहता रहता है आँखों से
जैसे कालिदास के
विरही यक्ष ने भेज दिया हो
मेघो को बरसने आँखों से।
मेघो को बरसने आँखों से।
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