Thursday, 24 November 2016

तेरी याद दिलाए रे

फागुन मस्त बयार चली, याद तुम्हारी आए रे
सरसों ने ली अंगड़ाई, पोर - पोर महकाए रे।

सब के संग रंग पिचकारी, सबके हाथ गुलाल रे 
     मैं  किस के संग खेलु होली, मेरी झोली खाली रे।     

बिना तुम्हारे कैसे मनाऊं, मैं होली त्यौहार रे                                                                                                    
खो गई मेरी हँसी ठिठोली, कैसे खेलु होली रे।  

बाजे ढोल, मृदंग,चंग, आज फिर होली आई रे
   कौन आएगा अब बाहों में,नयन नीर बरसाए रे। 

होली के दिन याद सताए ,कौन अबीर लगाए रे
बिना तुम्हारे मेरे कपडे, रह गए कोरे के कोरे रे। 


फागुन आया रंग-रंगीला, मन मेरा अकुलाए रे
  हलवा,गुजिया और मिठाई, तेरी याद दिलाए रे।

पिचकारी संग रंग उड़त है, हाथों उड़े गुलाल रे
हर चौखट मैं तुमको ढूंढूं, घर बाहर अंगनाई रे।



पेज संख्या ----५०

No comments:

Post a Comment