Sunday, 20 November 2016

यादों में बसे रहना

दुनिया जब सो जाती है
सपनों की गोद में
तब मैं खो जाता हूँ
तुम्हारी यादों की राहों में
पल-पल गुजरती रात में
मैं जोड़ता रहता रहता हूँ
तुम्हारी यादों की लड़ियों को।

मैं जानता हूँ
तुम मुझे अब नहीं मिलोगी
लेकिन तुम्हारी यादें
सदा मेरे साथ रहेगी।

बचपन में तुम्हारा
दुल्हन बन गांव आना
मेरा कॉलेज में पढ़ कर
छुट्टियों में घर आना
लड़ना-झगड़ना
प्यार मोहब्बत
बच्चों का होना
बहुओं का आना
पोते-पोतियों से
आँगन खिलखिलाना
कितना कुछ जीया हमने
इस जीवन में साथ-साथ।

सोच-सोच कर
खो जाता हूँ तुम्हारी यादों में
कईं छोड़ जोड़-जोड़ कर
ताजा करता हूँ
तुम्हारी यादों को
लौट-लौट कर आती है
तुम्हारी अनगिनत यादें।

अचरज करता हूँ तुम्हारा होना
मेरे दिल में इस तरह बसे रहना।






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