तुम अगर आओ तो
आज भीगने चले
झरनों की बौछारों में
तुम अगर आओ तो
आज संग-संग दौड़े
हँसती हरियाली में
तुम अगर आओ तो
आज बागों में झूमे
भौंरों के गुंजारों में
तुम अगर आओ तो
आज प्यार बरसाए
चमकती चांदनी में
तुम अगर आओ तो
आज प्रेम गीत गाऐं
बासंती हवाओं में
तुम अगर आओ तो
आज छमछम नाचे
बारिश की सरगम में।
पेज संख्या -----58
आज भीगने चले
झरनों की बौछारों में
तुम अगर आओ तो
आज संग-संग दौड़े
हँसती हरियाली में
तुम अगर आओ तो
आज बागों में झूमे
भौंरों के गुंजारों में
तुम अगर आओ तो
आज प्यार बरसाए
चमकती चांदनी में
तुम अगर आओ तो
आज प्रेम गीत गाऐं
बासंती हवाओं में
तुम अगर आओ तो
आज छमछम नाचे
बारिश की सरगम में।
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