Thursday, 24 November 2016

पहले वाली बात नहीं।

सब कुछ है पर तुम नहीं   
जीवन में सुख चैन नही 
दिन कटता है रीता-रीता   
    सपनों वाली रात नहीं।

 ठाट-बाट छूटा जीवन से    
  होठों पर मुस्कान नहीं 
 जीवन की मैं सुध-बुध भुला       
  काया का भी साथ नहीं।

आँखों में अब रात गुजरती      
प्यार भरे दिन रहे नहीं
जीवन फिर से हरा बने
  अब ऐसी बरसात नहीं।

मौजो के दिन बीत गए
सुख के सागर रहे नहीं
दर्द भरा अब जीवन मेरा  
     पहले वाली बात नहीं।



page sankhya ---- 43


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